गरीब बाप और बेटी

      
बेटी लेती जन्म जहाँ पर भाग्य वहाँ खुल जाता है,
पहले देखे बाप बेटी को बाद कोई देख पाता है,
घोड़ा बनता हाथी बनता बेटी को टहलाता है,
कंधे पर बैठा के बाप मेले में ले जाता है।

वक्त आ गया विद्यालय का बेटी को ले जाता है,
घूम के अंग्रेजी विद्यालय सरकारी में आता है,
मिल जाता है वहाँ दाखिल फिर बेटी को पढ़ाता है,
बेटी खातिर अपने शरीर को दिन रात वो जलाता है।।

पूरा हो गया विद्यालय भी कॉलेज का दिन आता है,
बेटी जाती बड़े कॉलेज अब बाप का दिल घबराता है,
सारा दिन अब बेटी का तो बाहर ही गुजर जाता है,
रात को आती बेटी घर में बाप बहुत समझाता है।।।

देखो अब तुम बड़ी हो गयी दुनिया वाले देखेंगे,
पापी लड़के देख के तुमको अपनी आँखे सेकेंगे,
प्यार में ना तुम पड़ना बेटी जिस्म से बस वो खेलेंगे
मिलेगी पैसे वाली उनको फिर तुमको धोखा देंगे।।।

21 की जब होती बेटी ब्याह का खयाल आता है,
दहेज की लिए वही बाप अब कर्ज मांगने जाता है,
खोज बिन के बीच उसे अच्छा लड़का मिल जाता है,
बरसों से सँजोया रत्न डोली में विदा कर आता है।।।

घर में आ के पत्नी से वह एक बात दोहराता है,
बेटी हो गयी विदा अब तो कर्ज का डर सताता है,
रोज़ द्वार पे चार आदमी कर्ज मांगने आता है,
कर्ज में दबा लाचार बाप घुट घट के ही मर जाता है।।।।।

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